21 सितंबर 2017

सजे माँ का दरबार (गीतिका)

छंद-शक्ति
मापनी- 122 122 122 12
पदांत- भी
समांत- आत

सजे माँ का दरबार नवरात भी.
चढ़े माँ का' चोला व बारात भी.

करें आरती रोज हो जागरण,
सजे फूल माला जवा(ह)रात भी.

मनायें सभी माँ को' परिवार सँग,
करायें भँडारे दें' सौगात भी.

दशैरा दिवाली मनाएँ पुन:,
दहन हो दशानन कोदें मात भी.

करें फिर सेस्वागत नये साल का,
नई जिंदगी की होशुरुआत भी.

19 सितंबर 2017

दिल्‍ली एक लहर पहुँचाएँ (गीतिका)


छंद- पदपादाकुलक चौपाई
मात्रा भार- 16 
विधान- द्विकल से आरंभ, अंत गुरु (वाचिक)
पदांत- पहुँचाएँ 
समांत- अर

हिंदी को घर-घर पहुँचाएँ.
ढाणी गाँव नगर पहुँचाएँ

रुकना नहीं डगर कैसी हो, 
हिन्‍दी उच्‍च शिखर पहुँचाएँ.

जैसे एक चाँद लख तारे,
इसको भी नभ पर पहुँचाएँ.

गूँजे अब आवाज हिंद से,
विश्‍व सुने वो’ असर पहुँचाएँ.

खुसरो, तुलसी, सूर, कबीरा,
की बानी दर-दर पहुँचायें.

बन जायें जिद्दी, सत्‍ता को,
अपना हक जिद कर पहुँचाएँ.

जनता का फिर ज्‍वार उठे अब,
चारों ओर खबर पहुँचाएँ.

'आकुल' बने राष्‍ट्रभाषा यह,
दिल्‍ली एक लहर पहुँचाएँ.

17 सितंबर 2017

शीघ्र फरमान हो (गीतिका)

आधार छंद- वाचिक स्रग्विणी
मापनी--212 212 212 212
पदांत- हो
समांत- आन

राष्ट्र भाषा बने राष्ट्र का मान हो.
गर्व से सिर तने विश्व का ध्यान हो.

रच सकेंगे तभी इक नया राष्ट्र हम,
एक मत से किसी दिन ये’ ऐलान हो.

आंग्ल भाषा रहे, शीर्ष हिंदी रहे,
आंग्ल का बोलियों में उचित स्थान हो.

राजभाषा सभी राज्य हिंदी रखें,
प्रांत की बोलियों का समाधान हो.

हौसलों ने दिये, पंख स्वच्छंद हैं,
फैसला हो अभी शीघ्र फरमान हो.

16 सितंबर 2017

कर्म करें कर्तव्‍य निभाएँ (गीतिका)


छंद- पदपादाकुलक चौपाई छंद (राधेश्‍यामी) मापनी रहित 
मात्रा भार- 16, 16 = 32
पदांत- बनायें
समांत- अल
 
कर्म करें कर्तव्‍य निभाएँ, इस जीवन को सरल बनायें.
मिलती भी हैं असफलताएँ,  कर्मक्षेत्र को सबल बनायें.

यह जीवन अनमोल मिला है, मिल जुल कर जीवन को जी लें,
करें प्रेम का बीजारोपण, संस्‍कारों की फसल बनायें.

मात-पिता रिश्‍ते-नातों से, मिलता है सम्‍बल निश्चित ही,
घर समाज की नींव बने दृढ़, ऐसा सुंदर महल बनायें.

जीवन मंथन है, दलदल में कितने ही जीवन पलते हैं,
कुछ तो है इस दलदल में भी, क्‍यों न स्‍वयम् को कमल बनायें.

जीवन देने का सृष्‍टा का कुछ तो होगा हेतुक ‘आकुल’
जगत्‍पिता परमेश्‍वर के इस महा'प्रबंध को सफल बनायें

15 सितंबर 2017

हिन्‍दी आलोकित कीजिए (गीतिका)



स्‍वच्‍छंद गीतिका
========== 
पदांत- कीजिए 
समांत- इत

हिंदी आभूषण से माँ को, सुशोभित कीजिए.
माँ वाणी स्‍पर्श से हिन्‍दी, आलोकित कीजिए.  

हम कृतार्थ हों जाएँ जो, उनका आशीष मिले,
सुमधुर राष्‍ट्रवाणी से सब को, मोहित कीजिए.   

सब मन-वचन-कर्म से इसको, हर दिन व्‍यक्‍त करें,
अभिव्‍यक्ति की है स्‍वतंत्रता, न तिरोहित कीजिए.

अब हिंदी का ध्‍वज विराट, फहराना है नभ पर,
गंगा जल से’ अभिमंत्रित कर आरोहित कीजिए.

अवसर है, इक जुट हो कर हिन्‍दी का घोष करें,
राष्‍ट्रवाणी हो, संविधान संशोधित कीजिए.

14 सितंबर 2017

हिन्‍दी दिवस पर प्रदत्‍त सम्‍मान पत्र


जीवन का मधुमास खिला (गीतिका)



गीतिका-
पदांत- लूँ
समांत- अर

मेघों से ले श्वेत रंग, अपनी कूँची में भर लूँ.
रश्मिरथी के पथ से पाती, पचरंगी मैं कर लूँ.

फिर लिख भेजूँ प्रीतम को, संदेश प्रेम का न्यारा,
करने को अभ्यंग सुवासित, चुटकी भर केसर लूँ.

पवन सुगंधित आएगी, लेकर संदेशा पी का,
सज सोलह शृंगार वसन तन, पर सतरंगी धर लूँ.

तन कंचन मन कस्तूरी, होता सिंदूरी यौवन,
करने को सम्मोहित उनको, थोड़ा और सँवर लूँ.

मन की अभिलाषा को पंख, लगे आकुलकुछ ऐसे
जीवन का मधुमास खिला, पी के सँग और ठहर लूँ.